नया अस्त्र

व्यंग


हम भारतीय दोस्ती को  दिल से करते ही हैं। दुश्मनी में भी धर्म ओर सीमा का ध्यान रखतें हैं। युद्ध में भी धर्म  की मर्यादाओं का पालन करतें हैं। घर मिलने आए  दुश्मन को विजयी होने का आशीर्वाद देते हैं। उसके द्वारा पूछने पर यह भी बता देतें हैं कि हमें कैसे और कब मारा जा सकता है?

ऐसे देश में नियम विरूद्ध लड़ाई की बात  सोचना भी पाप है। राजस्थान के दौसा जिले  के मेंहदीपुर इलाके में अतिक्रमण हटाने गई  टीम पर  गांव   वालों द्वारा सांप छोड़े गए। ये तो सरासर गलत और युद्ध के नियमों के विरूद्ध है। इससे  तो धर्म आधारित युद्ध करने वाले हम भारतीयों की नाक नीची हो गई। भाई अस्त्र शस्त्र मौका और नजाकत के अनुसार प्रयोग किए जातें हैं। हर छोटी बड़ी लड़ाई  में तो परमाणु  बोंब प्रयोग नहीं किया जा सकता। अतिक्रमण हटाने गई  टीम पर र्इंट - पत्थर तों फेंकना जायज है,आलू टमाटर भी चल सकतें हैं। सांप तो बहुत  ही गलत हैं। भले की आप सपेरे क्यों न हो? ऐसे ही पिछले दिनों किसी सिरफिरे ने उत्तर प्रदेश सरकार के एक मंत्री की कार में सांप डाल दिया। मंत्री जी के गले में जूते  चप्पल की माला डाली जा सकती है। खराब अंडे, टमाटर फेंके जा सकतें है। सांप नहीं। यह तो धर्म विरूद्ध कार्य  है।

सांप तो वन्य जीव है। उसे इस तरह किसी पर फेंकना  सांप के प्रति  ज्यादती है। सीधे -साधे रेंगने वाले इस प्राणी को फेंककर हम उसके प्रति  ही हिंसा कर रहे हैं। सांप को चोट पंहुचाकर हम  उसे  गुस्सा दिला रहे हैं ताकि  सामने वाले को अपना शिकार बनाए। उसे डस ले । ये बिल्कुल गलत है। ऐसा चलता रहा तो  आने वाले  टाइम में चलकर छोटे मोटे विवाद में हम सांप को युद्धास्त्र के रूप में प्रयोग करने लंगेगे। इसी तरह जैसे एक इराकी पत्रकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज  बुश पर पहली बार जूता फेंक कर विरोध करने वालो को नया शस्त्र सौंप दिया। पहले  नेताओं पर आलू टमाटर फेंके जाते थे, जूते नहीं। अब उनपर जूते फेंके जाने लगें हैं।        

ऐसे ही अतिक्रमण हटाने  वाली टीम पर सांप फेंक ना सरासर गलत है। इसे रोका जाना चाहिए।

अशोक मधुप

08/03/2014


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