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Showing posts from June, 2026

नेता जी का इलाज

 व्यंग 03/11/2015  मियां जुम्मन आज आए तो बहुत प्रसन्न  थे। चहचहा रहे थे। मुझे कुछ अटपटा सा लगा।  बैठने को कुर्सी  दी । पानी लाकर दिया ही था कि काफी पीने की फरमाईश करने लगे। मैं  चौंका- सदा चाय पीने वाले मिया जुम्मन को आज क्या हो गया? मैने पूछ ही लिया-क्या बात है। आज तो बिल्कुल बदले - बदले है। आवाज में चहचहाट ज्यादा है  तो  शौक भी कुछ नए हैं। बोले - देखो  कैसा ऊंट आया पहाड़ के नीचे। बाप -बेटे प्रदेश के विकास के कितने दावे करते थे। एक कहता । प्रदेश में सबसे ज्यादा विकास हुआ। दूसरा कहता। प्रदेश की जनता के लिए तीन साल में जो हमने किया। वो आज तक कोई  नहीं कर पाया। कितने  दावे थे । कितना शोर था । पर नेता जी बीमार क्या पड़े। सब  हवा हो गया। अपने गांव में मैडिकल कॉलेजबनाने वाले नेता जी को प्रदेश मुख्यालय के सबसे बड़े पीजी  में भी लाभ नहीं  हुआ। अपने प्रदेश से सटे दिल्ली को लांघ  हरियाणा के मेदांता  में इलाज के लिये गए। अब इनसे कोई पूछे -भाई  तुम्हारा बेटा प्रदेश का मुखिया और तुम्हें इलाज के लिए हरियाणा जाना पड़...

नेताओं पर बढ़ती जूतों की बौछार

24/12/2010 स्वााधीनता दिवस कार्यक्रम में  श्रीनगर मेंं ध्वजारोहण कार्यक्रम के दौरान  जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर जूता फेंके जाने के बाद   जूता  पुराण में एक और अध्याय जुड़ गया। जूता पुराण की कहानी इराक यात्रा के दौरान अमेरिकी प्रसिडेंट बुश पर एक पत्रकार वार्ता में  जूता फेंकने से शुरू हुई थी। उन पर एक नही दो जूते फेंके गए।हाल ही में लंदन में पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी  पर भी जूता फेंका  जा चुका है। नेताओं के लिए राहत की बात यह है कि जूते फें के जाने की घटनाओं में अभी तक अधिकांश   जूते निशाने पर नहीं लगे । हां  मुंह पर लगने से कहीं बहुत ज्यादा अपनी धमक और प्रभाव जरूर  छोड़ा। नेताओं के लिए यह राहत की बात है कि अब उनपर अंडे टमाटर फेंके जाने बंद हो गए। अंडे टमाटर  सड़े गले होते थे तो  नेताजी के कपड़े  भी खराब करते थे और बदबू भी फैलाते थे। जूते में अच्छा बात यह है कि इसमें बदबू नहीं आती और यह निर्धारित स्थान पर प्राय: लगता भी नहीं।  अब तक की घटनाओं से यह साबित होता है कि जूता फेंकने ...

कांग्रेस का परिवर्तन

 व्यंग्य 16/06/2014 चुनाव के बाद लगता है कांग्रेस में  आमूल चूल परिवर्तन हो रहा है। सत्ता में रहकर कमीशन खाने के लिए मशहूर कांग्रेसी दिल्ली में आजकल लू खा रहे हैं। भरी गर्मी में बिजली न आने को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। सडक़ों पर जुलूस निकाल रहे हैं। गर्र्मी के थपेड़े झेल रहे  हैं। ऐसा महान संघर्ष आजादी के बाद कांग्रेस ने कभी किया हो याद नहीं पड़ता। बड़े उद्योग को बढ़वा देने वाली कांग्रेस को लगता है अब लघु उद्योग की याद आई  है। इसीलिए तो वह दिल्ली  में घड़े लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। घड़े बनाने वाले प्रसन्न हैं कि पहले तो यदाकदा ही गर्मी में चंद घड़े बिकते  थे । अब तो थोक में बिक रहे हैं। घड़े बेचने वालों का सोच यह है कि यदि दिल्ली का बिजली संकट कुुछ और बढ़ा तो उन्हें और ज्यादा लाभ मिलेगा और घड़े बिकेंगे। फंूकने के लिए पुतले बनाने को बांस ,खप्पच और पुआल की मांग बढ़ी है । कुछ सोच रहे हैं कि भगवान इन कांग्रेसियों को  सदबुद्धि दे। लाइट के संकट को बताने के लिए लालटेन लेकर प्रदर्शन करें तो बहुत समय से स्टॉक में धूलफंक रही कुछ लालटेन भी बिक जांए। वैसे तो अब ये ...

मोदी की सीख

 व्यंग मोदी की सीख भाजपा के अधिकांश कार्यकर्ता  नेता , संासदों मंत्रियों  के मित्र रिश्तेदार परेशान है। नरेंद्र मोदी  सरकार के कई  मंत्री दुखी हैं। सब  चिंतित हैं। मोदी ने प्रधान मंत्री बनते ही ये क्या राग अलापना शुरू कर दिया?   यह क्या बात हुई कि आदेश जारी कर दिया कि अपने निजी स्टाफ में रिश्तेदारों को न रखें? भाई  चुनाव में कई करोड़ रूपया व्यय कर विजयी हुए हैं। इसका मतलब यह तो नहीं कि हम कमाए ना। अपने रिश्तेदारों को लाभ न पहुंचाए। अगर ईमानदार ही बनकर रहना था तो राजनीति में आने की क्या जरूरत थी। कुछ  तो बहुत चिंतित हैं। सूचनांए हैं कि मोदी के इस आदेश के बाद गहरे डिपरेंशन में है। कारण है कि ऐसे में अपने उन रिश्तेदारों और मित्रों को क्या जवाब देंगें । जिन्होंने दिन रात एक कर इस उम्मीद में चुनाव लड़ाया। उनका सोच था कि  कि नेताजी के सांसद बनने के बाद उनका भी कुछ भला हो जाएगा। कार्यकर्ता  परेशान हैं। हमसे क्या गलती हो गई जो भाजपा की सरकार बना दी। इससे तो कांग्रेस ,सपा ,बसपा  की सरकार अच्छी थी। सबको लूटने घर भरने का अधिकार तो ...

नेताओं का दौरा

नेताओं के दौरे चलने के समाचार  पढ़ते मियां जुम्मन  बोले -यार चलो हम भी दौरा कर आएं। आज तो मोदी घोड़े पर दौरा कर रहा है। बिजनौर के एक विधायक भी पिछले दिनों आदमखोर बाधिन को मारने घोड़े पर सवार होकर निकले थे।  भाई  क्या शानदार सवारी है घोड़ा।  उस पर बैठे मोदी और बाधिन को मरने निकले विधायक क्या शानदार नजर आ रहे थे। कुछ भी कहो घोड़े की सवारी है बिल्कुल शादी सवारी। हैलिकाप्टर हवाई  जहाज की सवारी  में वो बात नही जो घोड़े की सवारी में है।महाराजा रणजीत सिंह और  महाराणा प्रताप घोड़े पर बैठे बिलकुल अगल नजर आतें हैं। जो बात घोड़े की सवारी में है, वह बात हाथी की सवारी में भी नहीं है।ं हमें तो शादी में भी घुड़चढ़ी को मौका नहीं मिला। उन्होंने मुझसे   सवाल किया- यार तुम घुड़चढ़ी की रस्म मेंं   घोड़े पर सवार हुए होगे। बहुत शानदान लुक रह होगा।  उसके फोटो तो होंगे। जरा दिखाओ भाई। हम अपनी शादी की याद करते बोले - भाई  हम तो शादी के हादसे को आज तक भी नही़ भूले। ऐेसी दुर्घटना भूली भी नहीं जाती। जिस दिन हमारी शादी थी । उस दिन बहुत बड़ा सहालक...

अब मंथन हो रहा है

 व्यंग राजनीति भी अजीब शै  है। जब तक ताकत में हैं । तबतक  मदमस्त है । किसी के दुख -दर्द से कुछ लेना -देना  नहीं। बस अपना उल्लू सीधा करना है। जब सब कुछ लुट गया। सफीना मझधार में डूब गया तो  सब मंथन करतें  हैं। जब ताकत थी, तब कभी मंथन नहीं हुआ। तब तो जो कहा वो ब्रह्म वाक्य था।  माया मंथन कर रही हैं। बहुत बड़े शॉक में है। समझ नहीं आया - क्या हुआ? कैसे पूरी सोशल इंजीनियार फेल हो गई। मुलायम मंथन कर रहे हैं कि  उत्तर प्रदेश का यादव कैसे हिंदू बन गया? अजित गम में हैं कि उनके बिरादर जट ही उन्हें धोखा दे गए। वे जाट धोखा दे गए जिन्हें उसने कुछ ही दिन पूर्व केंद्रीय सेवाओं में आरक्षण दिलाया था। जाट तो उनके पक्के थे। वे भी हिंदू हो गए। खुलकर तो  नहीं  बोल पा रहे पर सब मन -मन में कह रहें होंगे कि सारे वोटर अहसान फरामोश निकले। सब ने धोखा दे दिया। सब हिंदू बन गए और मोदी को जाकर राजतिलक कर दिया।  सब मंथन कर रहे हैं। चुनाव में मुलायम का कुनबा तो बच गया । लालू का तो कुनबा ही राजनैतिक वैतरणी में डूब   गया । पत्नी बेटी दोनों धराशाई । पांच सासं...

मोदी का कुर्ता

 व्यंग लंबे समय से भाजपा के प्रधान मंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के आलोचक रहे मियां जुम्मन आजकल उनपर बहुत  मेहरबान है। मोदी की प्रशंसा करते नहीं थकते।  जहां अधिकतर  मुसलमान  मोदी को अपना विरोधी मानते हैं। मियां जुम्मन का यह रवैया चौंकाने वाला है। मियां जुम्मन आज आए तो मोदी जैसा आधी आस्तीन का कुर्ता  पहने थे। उनका  नया लुक  देखकर मैं  चौंका। मुझसे रहा नहीं गया। चटखारे से लेते पूछ ही लिया -मियां क्या बात है। मोदी का कुर्ता। वह बोले -देखो मियां कहो कुछ भी कहो पर मोदी है काम का आदमी। बहुत दूर की कोड़ी लाता है। इसी लिए प्रधान मंत्री बन गया। बहुत बड़ी सोच रखता है। वह सारे कार्य  भविष्य को देखकर करता है। ऐसा सभी करने लगे। तो  तरक्की करते जांए। उन्हें कोई भी नुकसान न पहुंचा पांए।   उसने राजनीति में तो नई  क्रांति  लाई  ही ,कुर्ते  का भी नया स्टाइल निकाल दिया। आधी आस्तीन का कुर्ता। बिल्कुल नई बात की। बांह के मोड़ तक का कुर्ता ।  ऐसा कुर्ता आज के  राजनैतिकों  के लिए ही नहीं, आम आदमी के लिए भी...

मियां जुम्मन का गुस्सा

 व्यंग मियां जुम्मन आज बहुत गुस्से में दिखाई दिए। जाने कहां से बड़बड़ाते चले आ रहे हैं। मैेंने उनका गुस्सा शांत करने को ठंडा पानी पिलाया । किंतु वे मानने को तैयार नहीं । मैंने पूछ ही लिया-आखिर बात क्या हुई ?क्यों  नाराज हो? बोले- चुनाव में  ये नेता एक  दूसरे को को गाली दें ।  एक दूसरे का चोर बतांए  या उचक्का । भाजपा बाड्रा का इतिहास बताए या भूगोल। कांग्रेस  मोदी पर अदानी को  लाभ पंहुचाने के दावे करे । हमें इससे कोई  लेना देना नही हैं। हम जानते हैं कि  ये सब एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं। इक नागनाथ है तो दूसरा सांपनाथ। जिसे जहां मौका मिल रहा है  लूट में लगा  है। या लुटवाने वालों के गैंग में शामिल है।   गुस्सा इस बात का है कि आपस में गाली देते अब ये जनता को गाली देने लगे हैं। अब  फारूख अबदुल्ला को लो- वह फर्मा  रहे हैं  कि मोदी को वोट देने वाले समुद्र में डूब जाएं। इन्होंने मोदी को वोट देने वालों को गाली  दी है। अब मोदी वाले कांगे्रस को वोटर को  गाली देंगे।  सब कहते है कि लोकतंत्र का आधार व...

अब तो समर्थक भी नहीं झगड़ते

मिया जुम्मन भी क्या है किसी न किसी समस्या को लेकर परेशान रहतें हैं। बिल्कुल देश के आम नागरिक की तरह । कभी उसकी समस्या मंहगाई  होती है। तो कभी बेरोजगारी। कभी  गन्ना मूल्य का भुगतान उन्हें सोने नही देता तो कभी प्याज का अच्छा दाम न मिलने पर उनके सामने  परिवार को रोटी रोजी उपलब्ध कराने की समस्या रहती है। आज फिर आ धमके और बोले -भाई   नेताओं के ये कैसे समर्थक हो गए। अब अपने नेता के लिए दूसरों से लड़ते झगड़ते नहीं। हमारे समय के समर्थक तो जरा -जरा सी बात पर दूसरे नेता के समर्थकों के सिर फोड़ते , गोली चलाने यहां तक की कत्ल करने तक को तैयार रहते थे। पता  नहीं आज के समर्थकों को क्या हो गया  नेता जी की बुराई  सुनकर इनके खून में उबाल नहीं आता । इनकी जवानी को जोश नहीं चढ़ता। मैंने कहा कि पहले नेता का कैरेक्टर होता था। वह जिस पार्टी  से जुड़ जाता था ता उम्र उसी में रहता। न दल बदलता और न अपना नेता। सो  उसके समर्थक भी ऐसेे ही होते थे। अब जब नेताओं का  कोई केरेक्टर  नहीं रहा तो समर्थक ही क्यों केरेक्टर रखे। वह भी समझ गया है कि आज इनके साथ है, कल...

मियां जुम्मन का बेटा और नौकरी

 व्यंग मियां जुम्मन आजकल परेशान है। लड़का है कि मानने को तैयार नहीं।अच्छी-खासीं नौकरी छोड़कर राजनीति में जाने की जिद किए  है। जुम्मन मियां उसे बार - बार बता रहे हैं कि राजनीति बहुत गंदी है। अच्छे व्यक्तियों की यहां जगह नहीं।   वे सवेरे ही वे बेटेे को  लेकर  आ धमके। समझाओ ना अच्छा खांसा आईएएस है। पर पता नहीं क्या बावलगत सवार हो गई कि राजनीति में जाने को  तैयार है । किसी की कुछ मान नहीं रहा। मैने सलाह दी भाई आइएएस हो । सबसे  बढ़िया पोस्ट है। पूरे राजाओं जैसे ठाठ का पद है। 60  साल तक नौकरी करो। खूब पैसा कमाओ । नेताओं से संबंध रखो। रिटायर होते ही राजनीति में   आ जाओ। आराम से जिंदगी गुजर होगी। अच्छी खांसी पेंशन मिलेगी। अधिकतर आईएएस और अधिकारी रिटायर्मेंट के बाद राजनीति में आ रहे हैं। अब तो फौज के रिटायर्ड अधिकारी भी राजनीति में उतरने लगें हैं। राजनीति में उमर की तो कोई   सीमा है नहीं। बिहार के पूर्व मुख्य मंत्री रामसुंदर यादव 93 साल की उम्र में चुनाव लड़ रहे हैं। लाल कृष्ण आडवानी 86 साल के होते राजनीति में सक्रिय हैं। मुरली मनोहर ज...

नया अस्त्र

व्यंग हम भारतीय दोस्ती को  दिल से करते ही हैं। दुश्मनी में भी धर्म ओर सीमा का ध्यान रखतें हैं। युद्ध में भी धर्म  की मर्यादाओं का पालन करतें हैं। घर मिलने आए  दुश्मन को विजयी होने का आशीर्वाद देते हैं। उसके द्वारा पूछने पर यह भी बता देतें हैं कि हमें कैसे और कब मारा जा सकता है? ऐसे देश में नियम विरूद्ध लड़ाई की बात  सोचना भी पाप है। राजस्थान के दौसा जिले  के मेंहदीपुर इलाके में अतिक्रमण हटाने गई  टीम पर  गांव   वालों द्वारा सांप छोड़े गए। ये तो सरासर गलत और युद्ध के नियमों के विरूद्ध है। इससे  तो धर्म आधारित युद्ध करने वाले हम भारतीयों की नाक नीची हो गई। भाई अस्त्र शस्त्र मौका और नजाकत के अनुसार प्रयोग किए जातें हैं। हर छोटी बड़ी लड़ाई  में तो परमाणु  बोंब प्रयोग नहीं किया जा सकता। अतिक्रमण हटाने गई  टीम पर र्इंट - पत्थर तों फेंकना जायज है,आलू टमाटर भी चल सकतें हैं। सांप तो बहुत  ही गलत हैं। भले की आप सपेरे क्यों न हो? ऐसे ही पिछले दिनों किसी सिरफिरे ने उत्तर प्रदेश सरकार के एक मंत्री की कार में सांप डाल दिया। मंत्री ...

राजनेता और ताश का खेल

व्यंग्य  मिया जुम्मन आज कुछ  चहकते नजर आए। दूर से ही आवाज देते चले आ रहे थे। मेरे कहने से पहले ही मूढ़े पर बैठते हुए बोले - देखा मैंं कहता था न कि प्रत्येक व्यक्ति सब काम नहीं कर सकता। दावे कितने करे ।  सच्चाई  कुछ और होती है। अब मोदी को ही लो । पूरे चुनाव में सैंकड़ों दावे किए । किं तु चुनाव बाद काम करने में  पसीने छूट रहे हैं। पांच राज्यपाल नहीं हटाए जा रहे। दो ने खुद ही  त्यागपत्र दे दिए। बाकी आंख दिखा  रहें है। जबकि भाजपाई  दावें कर रहे हैं कि देखते रहिए अभी कौन कौन हटतें हैं? थूक गटकते वह आगे बोले- भाई कुछ भी हो हटाने रखने में मुलायम सिंह यादव और उनके बेटे अखिलेश  को महारथ हासिल है। लोकसभा चुनाव हारते ही ३६  ओहदा प्राप्त मंंत्रियों को  एक बार में हटा  दिए। सपा की पूरी कमेटी भंग कर दीं। 50-50,60-60 आईएएस , आईपीएस अधिकारी तुरंत बदल दिए। चुनाव बाद से रोज थोक में अधिकारी बदलें जा रहे हैं। एक बिजली कंपनी का कभी विज्ञापन आया था- घर के सारे के सारे बदल दूंगा। यूपी के  माहौल को देखकर लगता है कि ये भी सारे अधिकारियों को इधर से...

नेताओं के लिए स्कूल

 नेताओं के लिए स्कूल मियां जुम्मन आजकल परेशान है । समझ नहीं आ रहा क्या बिजनेस करे? जिस  जगह  हाथ डालते हैं वही उलटा बैठता है।   मैने उन्हें सुझाव दिया -मिया एक स्कूल खोल लो। वे बोले कैसा? मैंने कहा - ऐसा स्कूल खोलो  जिसमें नेताओं को  गाली देना सिखाया जाए। दूसरों को अपमानित करने का फार्मूला बताया जाए। शर्त  यह होनी चाहिए कि स्कूल में सिखाई  गाली और अपमानित करने की कला ऐसी  हो कि चुनाव आयोग उस पर कार्रवाई न कर सके। यानी गाली दी जाए तो पार्लियामेंट्री भाषा में । स्कूल में ऐसे शिक्षक रखे जाए जो  राजनेताओं के लिए नई भाषा गढ़े। आज सारे नेता परेशान है। कुछ भी बोलते  हैं  मीडिया पकड़ लेता  है। उसके पकड़ते ही चुनाव आयोग कार्रवाई करता  है। मुकदमें दर्ज  करा रहा है। यूपी में तो कमाल हो गया।  उल्टा सीधा  बोलने के माहिर कैबनेट मंत्री आजम खां के रोड शो और सभाओं पर चुनाव आयोग ने रोक लगा दी।   ये ही हशर भाजपा के यूपी के प्रभारी अमित शाह का हुआ। अब दोनों परेशान हैं  कि काम कैसे चले? बिना बोले रह नहीं...

नेता जी की चप्पल

 व्यंग नेता जी की  चप्पल भटिंडा में आप पार्टी नेता केजरीवाल को किसी कार्यकर्ता  ने चप्प्पल क्या पहना दी, देशभर में हंगामा शुरू हो गया। जगह - जगह  इसकी चर्चा  होने लगी। कोई इस पर हंस रहा है तो दूसरा चटखारे लेकर मित्रों को किस्सा सुना रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी मीडिया को है। भाई  अपनी पार्टी के नेता जी है। खुद झुककर चप्पल पहनते परेशानी होती । ये देख एक कार्यकर्ता  ने मदद कर दी। इसमें क्या नई  बात  है? भारतीय संस्कृति में तो दूसरे की मदद करना एक पूण्य काम बताया गया है। कोई पूण्य काम कर रहा तो किसी को क्या परेशानी है। क्यों कोई उसे अच्छा कार्य करने से मना कर रहा है? इसमें आलोचना की क्या जरूरत है? फालतू  शोर मचाने का लाभ क्या है? वैसे भी हमोर नेताओं को तो कार्यकर्ता  चप्पल पहनाते ही रहे हैं।  वरिष्ठ कांगेस नेता नारायण तिवारी का संजय गांधी को एयरपोर्ट  पर पांव में चप्पल पहनाने का  सीन उस समय के व्यक्ति आज तक नहीं भूले। यूपी की एक दलित नेत्री के सैंडिल कई बड़े अधिकारी समय -समय पर साफ करते रहे हैं। बहिन जी के चरण स्पर्श...

बजट और मियांं जुम्मन की नाराजगी

 व्यंग बजट और मिया जुम्मन की नाराजगी मियां जुम्मन आज बहुत नाराज नजर आ रहे थे। आते ही फट पड़े। मोदी और मोदी के मंत्री अजीब हैं। आम  बजट में सब को कुछ न कुछ दिया। आयकर में छूट की सीमा बढ़ाई। सीनियर सिटीजन को लाभ दिया। दवाई सस्ती की। टीवी मोबाइल पर टैक्स छूट दी। गंगा सफाई के लिए बजट रखा। अभी आयकर में छूट की और तैयारी है। सब खुश हैं कि उनके लिए कुछ न कुछ जरूर किया।  मैने सवाल किया आप क्यों परेशान है? क्या बजट में आपको भी कुछ चाहिए था? वे बोले- नहीं भाई। मोदी को चाहिए था  कि एक नया विभाग खोलते । खत्म होते राजनैतिक दलों के कल्याण के लिए । उनके सुधार के लिए। बड़े दलों को तो जरूरत नहीं । पर छोटे दलों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। संसद, विधान सभा में उनके लिए रिजर्वेशन का प्रावधान किया     जाना चाहिए। कोई  ओर न जीत पाए । नेता जी खुद  तो जीत कर संसद पंहुच जाए। नेता जी अपने बेटे या बेटी को तो संसद पंहुचा दें। ऐसी तो बजट में व्यवस्था की जानी चाहिए थी। हारे दलों के कल्याण के लिए बनने  वाले मंत्रालय के माध्यम से  छोटे और मझले दलों को वोट बैंक बढ़ाने,...

हारों का प्रधानमंत्री

 व्यंग मियां जुम्मन आजकल बहुत ज्यादा तनाव में हैं। चुनाव होने के बाद  भाजपा की सरकार बने एक माह हो गया किंतु उनकी परेशानी कम नहीं हो रही। काफी चुप-चुप से हैं मनमोहन सिंह की तरह। शांत है  माया की तरह । दुखी है  मुलायम की तरह। उजड़े से है  नितीश की तरह। लुटें से हैं  अजित की तरह। आज  तो बहुत थके से लग रहे थे। मूढ़े पर बैठते भी उन्हें मेहनत सी करनी पड़ी। बैठने में बड़ा जोर लगाना पड़ा। मूढ़ासीन होते ही  आसमान की ओर जाने  कहां देखने लगे। मैने पानी पिलवाकर उनके लिए चाय मंगाई।  बातचीत शुरू करके के लिए पूछ ही लिया- क्या बात है। क्यों परेशान हो?   चाय का घूंट लेते हुए  बोले -यार गजब हो गया।  ऐसा नहीं होना चाहिए था। चुनाव हुए दो माह होने को आ गए।  चुनावी हार के बाद की देश के बड़बोलों की चुप्पी अच्छी नहीं लग रही। सोनिया का राहुल को राजतिलक करने का सपना टूट गया। मुलायम का तीसरे मोर्चे की जीत का ख्वाव  और उसके माध्यम से उनका प्रधान मंत्री बनने का इरादा  ध्वस्त हो गया। माया  दलितों के माध्यम से पीएम की कुर्सी  प...

चुनाव के फायदे

  व्यंग चुनाव के फायदे चुनाव सदैव चलता रहना चाहिए। पांच साल में चुनाव होना  ठीक नहीं।  हर साल होता रहे तो बहुत अच्छा रहे। इसके बहुत सारे फायदे हैं। सबसे बड़ा फायदा है कि नेताओं की काली कमाई हर साल बाजार में आती रहेगी। वे उसे लंबे समय तक जोड़ कर नहीं रख पांएगे। काला धन बाजार में आएगा तो जनता को लाभ होगा। चुनाव कार्य में  लगने वालों को अब पांच साल तक इंतजार करना पड़ता है। अब उनका कारोबार १२ माह चलेगा। चुनाव पंचवर्षीय योजना की तरह नहीं रहेगा। हर साल चुनाव होंगे तो कुछ नए और अच्छे नेता देश को मिलेंगे। पुराने गिरगिटों से पीछा छूटेगा। दूसरे  चुनाव प्रचार के दौरान बहुत सारी सच्चाई  पता चलती हैं। कांग्रेस ने बाड्रा को  फायदा पंहुचाया ।  मोदी ने अदानी को । चुनाव न होते तो ये बात किसी को पता न चलती।  अब सबको पता चल रही है। बड़े- बड़े  रहस्य जो जमीन में दबे थे। नेताओं द्वारा खोद खोद पर निकाले जा रहे हैं। हमारे यहां होली पर रंग के  दौरान कीचड़  और काला तेल भी कहीं -कहीं  लगाया जाता है। चुनाव में  तो  नेता मंच से एम दूसरे पर ...

मोदी ने बदली पूरी दुनिया

 व्यंग मोदी ने बदली पूरी दुनिया  मोदी के चुनाव में बहुमत  से विजयी    होने के साथ ही  ऐसा लगता है जैसे देश की राजनीति नहीं, पूरी दुनिया बदल गई। अमेरिका मोदी को बीजा न देने की रट लगाए था। अब बीजा थाली में सजाए खुद  तैयार है। अमेरिका आने का निमंत्रण भेज रहा है। मोदी को अपना अतिथि बनाने का उत्सुक है। उनका स्वागत करने को पलक पावंड़े बिछाए हैं। अमेरिका के सुर तो चुनाव के माहौल को देखते ही बदलने लगे थे। पर ये हालत हो जाएगी, ऐसा नहीं सोचा था।  ये तो हालत तब थी जब मोदी चुनाव में आधी आस्तीन का कुर्ता  पहनते थे। चुनाव में बहुमत पाते ही अब वे पूरी आस्तीन का कुर्ता  पहनने लगें है, देखना अब क्या क्या करिश्मा होता है? सारे सूरमा पहलवान खेत में चित्त दिखाई  देंगे।  अजित सिंह चुनाव में कहते घूम रहे थे ।  हमारे बागपत के पहलवान बड़े -बड़े ५६ इंच के सीने को एक घूंसे में तोड़  देते हैं । मोदी ने वो पंच मारा की अजित जयंत दोनों  बाप बेटों के सीने ही नहीं,सपने भी टूट गए। बेचारे घर बैठने को मजबूर हैं। चुनाव के बाद से कहीं नजर नहीं ...

उम्र की बंदिश

 व्यंग उम्र की बंदिश मियां  जुम्मन का पारा आज फिर चढ़ा है। सवेरे से ही गुस्से में है। डरते-झिझकते मैने गुस्से का कारण पूछ ही लिया। वे बोल मिया अजीब देश है। ८८ साल उम्र पूरी कर चुके   पूर्व  राज्यपाल और  पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी शादी कर रहे हैं।   ८२ साल के  दिग्विजय सिंह अपने से २५ साल कम्र उम्र की महिला से इश्क रचा रहे हैं। कह रहे हैं कि वे जल्दी शादी करेंगे।  ९३ साल की उम्र में बिहार के पूर्व  मुख्य मंत्री राम सुंदर दस  चुनाव लड़ रहे हैं। लाल कृष्ण आडवानी ८८ साल,  एचडी देवगौड़ा ८१ साल, मुरली मनोहर जोशी , बूटा सिंह और शातां कुमार ८० साल की उम्र में हाल में एक एमपी का   चुनाव  लड़े हैं। ७० साल से ऊपर आयु के चुनाव लडऩे वालों की तो लंबी लाइन है। थूक गटकते उन्होंने कहा कि शादी और चुनाव लडऩे की जैसे न्यूनतम उम्र निर्धारित है, वैसे ही अधिकतम उम्र का निर्धारण होना चाहिए। तै  होना चाहिए कि इस उम्र के बाद न चुनाव लड़ा जा सकेगा न शादी हो  सके गी। नौकरी करने ,फौज में काम करने की उम्र निर्धारित है...