मियां जुम्मन का गुस्सा
व्यंग
मियां जुम्मन आज बहुत गुस्से में दिखाई दिए। जाने कहां से बड़बड़ाते चले आ रहे हैं। मैेंने उनका गुस्सा शांत करने को ठंडा पानी पिलाया । किंतु वे मानने को तैयार नहीं । मैंने पूछ ही लिया-आखिर बात क्या हुई ?क्यों नाराज हो?
बोले- चुनाव में ये नेता एक दूसरे को को गाली दें । एक दूसरे का चोर बतांए या उचक्का । भाजपा बाड्रा का इतिहास बताए या भूगोल। कांग्रेस मोदी पर अदानी को लाभ पंहुचाने के दावे करे । हमें इससे कोई लेना देना नही हैं। हम जानते हैं कि ये सब एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं। इक नागनाथ है तो दूसरा सांपनाथ। जिसे जहां मौका मिल रहा है लूट में लगा है। या लुटवाने वालों के गैंग में शामिल है।
गुस्सा इस बात का है कि आपस में गाली देते अब ये जनता को गाली देने लगे हैं। अब फारूख अबदुल्ला को लो- वह फर्मा रहे हैं कि मोदी को वोट देने वाले समुद्र में डूब जाएं। इन्होंने मोदी को वोट देने वालों को गाली दी है। अब मोदी वाले कांगे्रस को वोटर को गाली देंगे।
सब कहते है कि लोकतंत्र का आधार वोटर है। ये उसे ही माफ करने को तैयार नहीं। उसे ही गाली देने पर उतर आएं हैं ।
मैने उन्हें समझाया मियां जुम्मन गुस्सा मत करो। गर्मी के मौसम में चुनाव हो रहे हैं। गर्मी का असर दिमाग का पारा चढ़ाएगा ही। दूसरे वोटर के रूख ने बड़े-बड़े के होश उड़ा दिए हैं। सारे नेता बौखलांए हैं। कोई मोदी से परेशान है। कोई नमो नम: से। इस चुनावी तूफान में बड़े बड़े तंबू उखड़ते नजर आ रहे हैं। अपने को बहुत बड़ा पहाड़ समझने वाले नेता धराशाई होने वाले हैं। ऐसे में झल्लाएं न तो क्या करें। वोटर उनकी लूटिया डूबोने में लगा है। बड़े बड़े दिग्गज- मठाधीश अपनी लूटियां डूबती देख रहे हैं।
चुनाव जीतने के ,वोटर को लुभाने के सारे हथकंडे फेल होते नजर आ रहे हैं। न गुरू जी काम न रहें हैं। न गंडे - ताबीज। वोटर के सताए नेता अब गुस्से में कुछ तो कहेंगे। अच्छा यह है कि इन नेता जी के मुंह से दिल की बात निकल गई। तुम आराम से बैठो । चुनाव परिणाम आने का इंतजार करो । देखना समुंदर में कौन डूबता है। वोटर को गाली देने वाले नेता या वोटर।
अशोक मधुप
18/05/2014
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