उम्र की बंदिश

 व्यंग

उम्र की बंदिश

मियां  जुम्मन का पारा आज फिर चढ़ा है। सवेरे से ही गुस्से में है। डरते-झिझकते मैने गुस्से का कारण पूछ ही लिया। वे बोल मिया अजीब देश है। ८८ साल उम्र पूरी कर चुके   पूर्व  राज्यपाल और  पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी शादी कर रहे हैं।   ८२ साल के  दिग्विजय सिंह अपने से २५ साल कम्र उम्र की महिला से इश्क रचा रहे हैं। कह रहे हैं कि वे जल्दी शादी करेंगे।  ९३ साल की उम्र में बिहार के पूर्व  मुख्य मंत्री राम सुंदर दस  चुनाव लड़ रहे हैं। लाल कृष्ण आडवानी ८८ साल,  एचडी देवगौड़ा ८१ साल, मुरली मनोहर जोशी , बूटा सिंह और शातां कुमार ८० साल की उम्र में हाल में एक एमपी का   चुनाव  लड़े हैं। ७० साल से ऊपर आयु के चुनाव लडऩे वालों की तो लंबी लाइन है।

थूक गटकते उन्होंने कहा कि शादी और चुनाव लडऩे की जैसे न्यूनतम उम्र निर्धारित है, वैसे ही अधिकतम उम्र का निर्धारण होना चाहिए। तै  होना चाहिए कि इस उम्र के बाद न चुनाव लड़ा जा सकेगा न शादी हो  सके गी। नौकरी करने ,फौज में काम करने की उम्र निर्धारित है। तो यहां क्यों नहीं?  यहंा भी रिटायरमेंट की उम्र तै  होनी चाहिए।

मैने मुस्कराते हुए कहा -मियां  राजनीति में रिटायरमेंट की उम्र तै  हो , ये तो आपकी बात समझ में आती है, किंतु प्यार पर तो प्रतिबंध मत लगाओ।  दुनिया में बहुत सारे ठेकेदार पहले ही प्यार के दुश्मन बने बैंठे हैं। खाप पंचायते कहतीं हैं कि गोत्र में शादी नहीं होने देंगे।  जातियों के ठेकेदार अंतर्जातीय विवाह का विरोध कर रहे हैं तो कुछ धर्मगुरू यह बर्दाश्त करने को तैयार नहीं कि उनके धर्म के युवक या युवती दूसरे धर्म  की युवती या युवक से शादी करें। आप तो ऐसा मत करो। तिवारी जी ने कुछ नया थोड़े ही किया है।  जवानी की गलती को अब  जाकर सुधारा है। अगर उज्जवला से इश्क के दौरान  यह शादी हो जाती तो जो हाई प्रोफाइल ड्रामा अब हुआ , वह न होता। रोहित को कोर्ट  में जाकर गुहार लगानी ही न पड़ती कि  तिवारी को  उनका जैविक पिता घोषित किया जाए। कई  साल तक कोर्ट में जो केस चला उसकी जरूरत ही न पड़ती। तिवारी जी के बाद उनकी संपत्ति को लेकर  विवाद होते। मुकदमे  चलते । नए -नए  वारिस निकल कर सामने आते। इस शादी से  वे सब खत्म हो गए। एक मुकदमें ने बहुत सारे विवाद निपटा दिए। परेशान मत होओ ।  यही हालत दि्िग्वजय सिंह की हैं।  बकौल गालिब -इश्क पर जोर नहीं ,है ये आतिश गालिब, जो  लगाए न लगे और बुझाए न बुझे। वैसे भी बुजुर्गो ने कहा है - जब मियां-बीवी राजी, तो क्या करेगा मुल्ला काजी। करने देा जो कर रहें हैं। वैस बुढ़ापे के इश्क गांव , मुहल्ले का मनोरंजन खूब करते हैं। बस चटखारे लेकर उन्हें सुनते और सुनाते हैं। 

तिवारी जी के किस्से काफी समय से चर्चा में थे।अब दिग्विजय चाचा तो छिपाए थे, वह सामने आ गया।  तिवारी जी ने शादी कर ली। दिग्विजय सिंह की होने वाली है। दोनों के हनीमून के आने  वाले  समाचारों का  इंतजार करो। और  तब तक इन इश्क के किस्सों को चटखारे  लेकर सुनो और दूसरों को सुनाओ।   

अशोक मधुप


20 May 2014

  


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