मोदी ने बदली पूरी दुनिया

 व्यंग

मोदी ने बदली पूरी दुनिया

 मोदी के चुनाव में बहुमत  से विजयी    होने के साथ ही  ऐसा लगता है जैसे देश की राजनीति नहीं, पूरी दुनिया बदल गई। अमेरिका मोदी को बीजा न देने की रट लगाए था। अब बीजा थाली में सजाए खुद  तैयार है। अमेरिका आने का निमंत्रण भेज रहा है। मोदी को अपना अतिथि बनाने का उत्सुक है। उनका स्वागत करने को पलक पावंड़े बिछाए हैं। अमेरिका के सुर तो चुनाव के माहौल को देखते ही बदलने लगे थे। पर ये हालत हो जाएगी, ऐसा नहीं सोचा था। 

ये तो हालत तब थी जब मोदी चुनाव में आधी आस्तीन का कुर्ता  पहनते थे। चुनाव में बहुमत पाते ही अब वे पूरी आस्तीन का कुर्ता  पहनने लगें है, देखना अब क्या क्या करिश्मा होता है? सारे सूरमा पहलवान खेत में चित्त दिखाई  देंगे। 

अजित सिंह चुनाव में कहते घूम रहे थे ।  हमारे बागपत के पहलवान बड़े -बड़े ५६ इंच के सीने को एक घूंसे में तोड़  देते हैं । मोदी ने वो पंच मारा की अजित जयंत दोनों  बाप बेटों के सीने ही नहीं,सपने भी टूट गए। बेचारे घर बैठने को मजबूर हैं। चुनाव के बाद से कहीं नजर नहीं  आ रहे। सिट्टी पिट्टी गुम है।

तीसरे मोर्चे के माध्यम से  प्रधानमंत्री बनने का सपना देखने वाले मुलायम सिंह अभी तक   हादसे से नहीं उबरे। कुछ होश सा आया तो कहने लगे कि उनके बिरादर यादव ही हिंदू बन गए। अब उन्हें कोई क्या समझाए कि  उन पर भी  हिदुत्व का असर दिखाई देने लगा है। हिंदुओं की ताकत का पता चलने पर उनका मुसलिम  पे्रम कुछ हल्काया लगता है। इसीलिए अब  मुसलमानों को धकियाना शुरू कर दिया। मुख्य सचिव   जावेद उस्तानी को बाहर का रास्ता दिखा दिया।  उनकी जगह एक हिंदू  आलोक रंजन  को उत्तर प्रदेश का  मुख्य सचिव बनाया गया है। 

मायावती को तो इतना धक्का  लगा कि उसने तो संगठन मेंं तो भारी फेरबदल किया ही। उपचुनाव न लडऩे का फैसला ले लिया। सब सकतें में हैं। सोच रहे हैं कि  कहीं गम में डूबी  मायावती कुछ और भंयकर निर्णय न ले लें।  अभी चुनाव न लडऩे का निर्णय लिया है। कहीं संन्यास लेने का निर्णय ले लिया तो क्या होगा? 

वैसे सन्यास लेने का चुनाव न लडऩे से कोई  वास्ता नहीं है। बड़े- बड़े सन्यासी राजनीति में हैं। उमा भारती, योगी आदित्यनाथ आदि बहुत सारे सन्यासी सन्यासी होकर भी राजनीति में सक्रिय हैं। उमा भारती तो राजस्थान की मुख्य मंत्री रह चुकीं हैं। इस बार केंद्र में कैबनेट मंत्री है।   

मोदी समझ नही पा रहे। इन्हें चाहिए ये कि सारे विपक्ष के नेताओं की मन मस्तिष्क की थोरोली जांच कराए। सारे के  सारे विपक्षी नेता डिपरेशन में है।  उनका तुंरत उपचार कराए जाने की बहुत ज्यादा जरूरत हैं। किसी को कहीं कुछ हो गया। इस हादसे में कोई चीखने चिल्लाने लगा।  पागलपन की हरकत करने लगा तो सारी जिम्मेदारी फिर  मोदी पर ही आएगी। सब  आरोप प्रतयारोप लगाएंगे। कहेंगे कि अमुक नेता जी के पागल होने  का कारण मोदी को इतना ज्यादा बहुमत मिलना है।  जनता क ो  भी लांछन लगाएंगे। कहेेंगे  मादी को प्रधानमंत्री बनाना  था तो बना देती।  इतना बहुमत देने की क्या जरूरत थी। बहिन जी,अजित जी को भी एक दो सीट मिल जाती तो किसी का क्या चला जाता? पूरा सूपड़ा ही  तो साफ नहीं करना चाहिए था। कुछ दया तो निर्दलियों पर भी दिखाई  जानी  चाहिए थी।

अशोक मधुप

06/02/2014



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