मोदी की सीख

 व्यंग

मोदी की सीख

भाजपा के अधिकांश कार्यकर्ता  नेता , संासदों मंत्रियों  के मित्र रिश्तेदार परेशान है। नरेंद्र मोदी  सरकार के कई  मंत्री दुखी हैं। सब  चिंतित हैं। मोदी ने प्रधान मंत्री बनते ही ये क्या राग अलापना शुरू कर दिया?   यह क्या बात हुई कि आदेश जारी कर दिया कि अपने निजी स्टाफ में रिश्तेदारों को न रखें? भाई  चुनाव में कई करोड़ रूपया व्यय कर विजयी हुए हैं। इसका मतलब यह तो नहीं कि हम कमाए ना। अपने रिश्तेदारों को लाभ न पहुंचाए। अगर ईमानदार ही बनकर रहना था तो राजनीति में आने की क्या जरूरत थी।

कुछ  तो बहुत चिंतित हैं। सूचनांए हैं कि मोदी के इस आदेश के बाद गहरे डिपरेंशन में है। कारण है कि ऐसे में अपने उन रिश्तेदारों और मित्रों को क्या जवाब देंगें । जिन्होंने दिन रात एक कर इस उम्मीद में चुनाव लड़ाया। उनका सोच था कि  कि नेताजी के सांसद बनने के बाद उनका भी कुछ भला हो जाएगा। कार्यकर्ता  परेशान हैं। हमसे क्या गलती हो गई जो भाजपा की सरकार बना दी। इससे तो कांग्रेस ,सपा ,बसपा  की सरकार अच्छी थी। सबको लूटने घर भरने का अधिकार तो देती थी। ये  महाश्य कहने लगे,ये मत करो, वो मत करो।

कहतें हैं खर्चे  कम करें? इतनी गर्मी में दिन रात भाग दौडक़र जाने कैसे करके विजयी हुए हैं़ अब ये क्या बता हुई कि शरीर में घुंसी गर्मी से राहत के लिए  हम एसी में आराम भी न करें। सरकारी सुविधाओं का भोग न करें।




कार्यकर्ता  कहते है कि यह तो ये क्या हुआ। इसके लिए दिन रात थोड़े की एक किया था। ऐ तो इसलिए किया था। कि कामनवैल्थ देशों के खेलों में जैसी लूट हुई। वैसी  हम भी करेंगे। कांग्रेस में लूट के भ्रष्टाचार के नए नए रिकार्ड  बनें,   हम  भी कुछ शानदार रिकार्ड  बनाकर दिखाना  चाहतें हैं। गिनीज बुक में भले ही नाम दर्ज  हो या न हो, मीडिया में तो हमारी करतूतों के चर्चे  होंगे।

ये क्या बात हो गई बाराबंकी की सांसद प्रियकां  रावत ने  पिता उत्तम राव रावत को अपना प्रवक्ता बना दिया। तो मोदी डाटने लगे। उसे मजबूरन पिता जी को हटाना पड़ा।  एक पुराने नेता ने कहा - इसमें चिंता की क्या बात है प्रिंयका नाम किसी और का दे दे काम धाम पिता जी ही देखते रहेंगे।  

राजनीति के पुराने घुघाड़ ने कहा  देखते जाओ अभी एक प्रिंयका ने शुरूआत की है  आगे जाने कितने प्रिंयक और प्रियंका निकल कर आगे आएंगे।  एक दूसरे ने कहा - चुनाव से पूर्व तक नरेंद्र मोदी आधी आस्तीन का कुर्ता  पहनते थे। चुनाव परिणाम आने के बाद उनके कुर्ते का स्टाइल बदल गया। अब वे पूरी आस्तीन का कुर्ता  पहनने  लगें हैं। कुछ दिन प्रधानमंत्री की कुर्सी  का चस्का लगने दो धीरे धीरे सब बदलने लगेगा। दूसरों को कम खर्च  की सीचा देने  वोल खुद ही खर्चे  करने एशोआराम का जीवन जीने में लग जांएगें।

अशोक मधुप

 

एक जनवरी 2014









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