कांग्रेस का परिवर्तन
व्यंग्य
16/06/2014
चुनाव के बाद लगता है कांग्रेस में आमूल चूल परिवर्तन हो रहा है। सत्ता में रहकर कमीशन खाने के लिए मशहूर कांग्रेसी दिल्ली में आजकल लू खा रहे हैं। भरी गर्मी में बिजली न आने को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। सडक़ों पर जुलूस निकाल रहे हैं। गर्र्मी के थपेड़े झेल रहे हैं। ऐसा महान संघर्ष आजादी के बाद कांग्रेस ने कभी किया हो याद नहीं पड़ता।
बड़े उद्योग को बढ़वा देने वाली कांग्रेस को लगता है अब लघु उद्योग की याद आई है। इसीलिए तो वह दिल्ली में घड़े लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। घड़े बनाने वाले प्रसन्न हैं कि पहले तो यदाकदा ही गर्मी में चंद घड़े बिकते थे । अब तो थोक में बिक रहे हैं। घड़े बेचने वालों का सोच यह है कि यदि दिल्ली का बिजली संकट कुुछ और बढ़ा तो उन्हें और ज्यादा लाभ मिलेगा और घड़े बिकेंगे। फंूकने के लिए पुतले बनाने को बांस ,खप्पच और पुआल की मांग बढ़ी है । कुछ सोच रहे हैं कि भगवान इन कांग्रेसियों को सदबुद्धि दे। लाइट के संकट को बताने के लिए लालटेन लेकर प्रदर्शन करें तो बहुत समय से स्टॉक में धूलफंक रही कुछ लालटेन भी बिक जांए। वैसे तो अब ये बिकती नहीं। एसी में आराम फरमाने वाले नेता गर्मी में सडक़ों पर पसीने - पसीने होकर त्याग कर रहें हैं। ये बताने में लगे हैं कि वे ही जनता के वास्तविक प्रतिनिधि है। उसकी समस्याओं का हल वे ही चाहते हैं। ये अलग बात है कि सत्ता में रहकर उन्हें जनता की परेशानी याद नहीं आती। सत्ता से बाहर होतें हैं, तो अब उन्हें कितना ख्याल आ रहा है।
सोनिया जी को ही लो । अब तक यह बड़े राजनैयिक , मंत्रियों को यदा -कदा भोज देतीं थीं। बड़ी नेता हैं सो आम कार्यकर्ताओं से मिलने का अवसर ही नही मिलता। कभी रास्ता चलते दिखाई देने पर हाथ जोडक़र नमस्ते ले ली, या सभा में हाथ उठाकर अभिनंदन स्वीकार कर लिया तो समझो कार्यकताओं को कृतार्थ कर दिया। इस बार तो उन्हें अपने कार्यकर्ता याद आ गए। अपने लोक सभा क्षेत्र में जाकर कार्यकताओं का विजयी बनाने के लिए आभार ही नहीं जताया उनकी शानदार दावत भी की। पहली बार चुनाव जीतने के बाद किसी नेता को कार्यकर्ता याद रहे हैं। अन्यथा चुनाव खत्म हुआ कि कार्यकताओं का ध्यान खत्म । जब चुनाव आएंगे , तब सोचेंगे। लगता है सोनिया जी से अन्य कार्यकर्ता कुछ सीख लेंगे और अपने अपने क्षेत्र में जाकर कार्यकर्ताओं की दावत करेंगे। कुछ गिफ्ट -उफट भी दिए जा सकतें है। कांग्रेस के एक मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने तो चुनाव के समय मीडिया को गिफ्ट बांट दिए थे। उस समय मीडिया ने हल्ला मचाया था। अब तो चुनाव है नहीं । दावत के साथ चाहे जैसे गिफ्ट बांटो न मीडिया उंगली उठाएगा, न चुनाव आयोग कुछ कहेगा।
अशोक मधुप
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