चुनाव के फायदे

 


व्यंग

चुनाव के फायदे

चुनाव सदैव चलता रहना चाहिए। पांच साल में चुनाव होना  ठीक नहीं।  हर साल होता रहे तो बहुत अच्छा रहे। इसके बहुत सारे फायदे हैं।

सबसे बड़ा फायदा है कि नेताओं की काली कमाई हर साल बाजार में आती रहेगी। वे उसे लंबे समय तक जोड़ कर नहीं रख पांएगे। काला धन बाजार में आएगा तो जनता को लाभ होगा। चुनाव कार्य में  लगने वालों को अब पांच साल तक इंतजार करना पड़ता है। अब उनका कारोबार १२ माह चलेगा। चुनाव पंचवर्षीय योजना की तरह नहीं रहेगा। हर साल चुनाव होंगे तो कुछ नए और अच्छे नेता देश को मिलेंगे। पुराने गिरगिटों से पीछा छूटेगा।

दूसरे  चुनाव प्रचार के दौरान बहुत सारी सच्चाई  पता चलती हैं। कांग्रेस ने बाड्रा को  फायदा पंहुचाया ।  मोदी ने अदानी को । चुनाव न होते तो ये बात किसी को पता न चलती।  अब सबको पता चल रही है। बड़े- बड़े  रहस्य जो जमीन में दबे थे। नेताओं द्वारा खोद खोद पर निकाले जा रहे हैं। हमारे यहां होली पर रंग के  दौरान कीचड़  और काला तेल भी कहीं -कहीं  लगाया जाता है। चुनाव में  तो  नेता मंच से एम दूसरे पर काला तेल और कींचड़  उछालने में लगे  हैं। सभी एक दूसरे के  दामन पर कालिख पोतने को आतुर हंै।     

पिं्रयका ने भाजपा को चुहां बताया तो कोई किसी को बिल्ली बता रहा है। कहीं कोई कुत्ता । भटिंडा की कांग्रेस की प्रत्याशी ने पूरे अकालीदल को ही सांप बता दिया। अपने को अधिकतर प्रत्याशी सब शेर बताने में लगे हैं। जनता भौचक्की है। उसकी समझ में नहीं  आ रहा कि उसके नेताओं को क्या हो गया। राजनीति में रहकर ये इंसान से जानवर कैसे बन गए? कब बन गए? लगता है कि नेताओं के कपड़े पहने सारे जानवर राजनीति में उतर आए हैं। जानवर कब राजनीति में आ गए पता ही नहीं चला। जंगलों से शेर गायब होते जा रहे हैं। राजनीति में शेर  बढ़ते  जा रहे हैं। शेर के साथ सपा सेर की भी बाढ़  आई  हुई  है। 

चुनाव से हमारा भाषा ज्ञान समृद्ध होता है। चुन- चुन पर शब्द और विशेषण प्रयोग किए जातें हैं।  पुस्तकों से गायब हो चुके राजकुमार और शहजादे, नमूने जैसे शब्द फिर सुनाई देने लगें हैं। अब तक दामाद ही होते थे। अब वे दामाद श्री हो गए। सास - सास होती थीं  अब वह सासू मां हो गईं। राहुल  सोनिया,वाड़ा और प्रियका का मिला जुला नाम बना आरएसवीपी।

जो  होता  नहीं भी वह राजनीति में हो रहा है। ५६ इंच का सीना प्राय: नहीं होता किंतु एक नेता का दावा  है कि उनका सीना छप्पन इंच का है। इस ५६ इंच के सीने पर प्रिंयका जी ने सलाह दी कि सीना बड़ा नहीं दिल बड़ा होना चाहिए। अब प्रियंका जी को कौन बताए कि दिल का बड़ा होना तो बहुत बड़ी बीमारी है। बड़े दिल का तो आपरेशन भी कठिन होता है। उनकी सलाह मोदी के लाभ के  लिए हैं या नुकसान के लिए  यह समझ नहीं आ रहा। 

  अशोक मधुप

05/12/2014


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